परम पूज्य कबीर परमेश्वर जी ने कि जब सृष्टि की रचना करने के बाद इंसानों को बनाया था उसके बाद में उन लोगों को खाने पीने की आवश्यकता हुई तो परमात्मा ने फलदार वृक्ष बनाए और कहा कि तुम यह सब बीज वाले फल खा सकते हो और जानवरों को बनाने के बाद में जानवरों को भी मांस खाने का आदेश नहीं दिया था तो यह मनुष्य मांस क्यों खाता है इस बारे में आज तक किसी ने यह नहीं बताया क्यों खाता है लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने यह बताया है यह मन जो का रूप है 21 ब्रह्मांड का मालिक है वह इस जीव से मांस खाने के लिए प्रेरित करता है और शराब पीने के लिए प्रेरित करता है और वह इंसान अपने मन के बस के अंदर होकर कर्म करता है परमात्मा का ज्ञान होने के बाद में यह मन शांत होकर बैठ जाता है
मदिरा पीवे कड़वा पानी 70 जन्म स्वान के जानी एक बार शराब पीने से 70 जन्म कुत्ते के मिलते हैं उसकी आत्मा को और जो आज वर्तमान में शराब पर आधारित हो रहे हैं उन लोगों के साथ ना जाने अगले जन्म में क्या क्या होगा इतना कष्ट उठाएंगे वह लोग पशु योनि में जाकर भी उनको शांति नहीं मिलेगा संतगरीबदास जी महाराज ने कहा है सोनारी जारी करें सूरा पान सौ बार एक चिलम हुक्का भर डूब काली धार तंबाकू का सेवन करने वालों के साथ नरक के अंदर क्या-क्या होगा जो तंबाकू का सेवन करता है उसको घोर नरक में डाला जाएगा आंखों का जो बीज उत्पन्न होता है वह गाय के खून से हुआ है और गाय के खून से तंबाकू उत्पन्न हुई है उसका सेवन करने वाला महा पापी प्राणी होता है अमल का सेवन करने वाले प्राणी को घोर नरक में डाला जाता है और उसके मुख के अंदर पेशाब करते हैं
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